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दोस्ताना-2 में हिना रब्बानी

Posted On: 26 Jul, 2011 Others में

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ठीक कारगिल की शहादत के मौके पर पाकिस्तान की नयी विदेश मंत्री हिना रब्बानी भारत पहुंची हैं। यह टीस बढ़ाने सरीखी ही है कि जिनकी शहादत पर हम इन बारह वर्षों में बारह बार भी शायद ही बामुश्किल आंसू बहाए हों उनकी शहादत के मौके पर हिना देश में उतरती हैं। हवाई अड्डे पर उनका स्वागत होता है। वह एक खूबसूरत अदाकारा के मानिंद चश्मा लगाए, लटों को संभालती, हाथ हिलाती, फिर उसी पुराने ढर्रे पर विदेश मंत्री के स्तर पर वार्ता करेंगी। वह भी इस बीच जब मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली एयरपोर्ट पर आतंकी हमले की संभावना को देखते हाई अलर्ट किया गया है। पहले भी आगरा में मुशर्रफ वार्ता कर चुके हैं। पाक के वर्तमान प्रधानमंत्री भारत-पाक के बीच विश्व कप के मैच का गवाह बन चुके हैं। ठीक ऐन कारगिल युद्ध में मारे गए शहीदों को याद करने के बदले हम हिना की खूबसूरती का राज जानने यहां बुला लिया है यह भारत के लोग ही बर्दाश्त कर सकते हैं। वैसे भी यहां के लोगों को खूबसूरती से बहुत ही हमदर्दी, लगाव है। श्रीलंका की अदाकारा से हाल ही में लोग मर्डर करवा चुके हैं। अब जहां शहीदों की चिताओं पर मेला लगाने की बात हो रही हो तो उसमें एक हुस्न का जलवा बिखेरने किसी को तो बुलाना ही था। वैसे भी जब भारत पंद्रह अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है। लाल किले पर झंडा फहराने की तैयारी होती है तो उससे पहले एक ब्रिटिश मेहमान को जरूर दर्शकदीर्घा में बैठे देखा जा सकता है। ठीक वही हाल है जब कारगिल में हम विजयी हुए, हमारा विश्व विजयी तिरंगा एकबार फिर सकुशल लहराया तो उसकी बरसी पर हम किसी विदेशी मेहमान को आमंत्रित न करें तो यह तो हमारे संस्कार, संस्कृति के विपरीत ही होगा। सो, परंपरा के अनुरूप हमने हिना को बुला लिया। उससे खूबसूरत फन, अदाकारा फिलहाल हमारे पास नहीं है जो दोनों देशों में फिर से एका करा दे। भारत-पाक में दोस्ती की गांठ पड़ जाए तो फिर हिना की बल्ले-बल्ले, तुरंत अपने महेश भट्ट मर्डर-3 में हुस्न की मल्लिका के रूप में हिना को परोसने का आफर दे दे। वैसे भी, हिना के पास जाली नोटों की भी कमी नहीं हैं। उनके देश में, पाकिस्तान में नकली गांधी खूब छप रहे हैं वह भी सरकारी प्रेस में। सरकारी प्रेस से एक साथ भारतीय व पाकिस्तानी नोट निकल रहे हैं। ऐसे में, भारतीय फिल्म निर्माताओं को दाउद व डी कंपनियों से पैसे भी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पाक सिक्योरिटी प्रेस में भारतीय करेंसी छापना और गांधी जी को नेपाल, बांग्लादेश और दुबई के रास्ते होते हुए इंडिया भेज कर आतंकी संगठनों को खरीदने वाले पाकिस्तान की इस दिलकश अदाकारा से मनमोहन सरकार क्या उगलवाना चाहती है। यही शायद कि पाकिस्तान में बेनजीर के जाने के बाद हिना बेशकीमती हथियार है जिसे वह शांति के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है वह भी अपने सबसे करीबी दोस्त के खिलाफ। हिना पाक के लिए वही बनेगी जैसा बाबा रामदेव के लिए बालकृष्णन बने। बालकृष्णन फिलहाल कहां हैं। उनके गायब होने का सनहा दर्ज किया जा रहा है। पूरे देश में एक्सटेंशन की बात हो रही है। नोएडा भूमि एक्सटेंशन की बात फंसी है। धोनी फंसे हैं। उनका एक्सटेंशन होगा कि नहीं। फिलहाल कप्तानी में वे फेल हो रहे हैं। ना बल्ले से रन निकाल रहे हैं ना ही टीम में जोश दिख रहा है। उनपर एक मैच का प्रतिबंध लगने की भी संभावना बन गयी है। सचिन दूसरे से चौथे रेंक पर लुढक गए हैं। हरभजन टेस्ट रैकिंग में नंबर दस से बाहर हो गए। अब फिर वही होगा जो देवानंद ने सोचा था, इमरान खान के साथ एक फिल्म बनें और हिना को दोस्ताना स्टाइल में प्रियंका की जगह दोस्ताना-2 में दिखाया जाए तो हमारे शहीदों की आत्मा को शायद कुछ शांति मिले। वैसे भी अमेरिकी सेना में अब समलैंगिक सैनिकों की मौज होने वाली है। अमेरिका के सभी समलैंगिक सैनिक के रूप में बहाल किए जाएंगे। बराक ओबामा ने गे पर लगे प्रतिबंध को खत्म करने की मुहर लगा दी है। अब अगर पाकिस्तान को आवाज देने में परेशानी हो भी तो कोई बात नहीं। हमारी फिल्म इंड्रस्टी इतनी समृद्ध है कि कपड़े तो आराम से बिना आवाज किए ही उतरवा लेगी। वैसे पाकिस्तान मुंबई हमले के संदिग्धों की आवाज व नमूने अपने पास रखे, भारत को ना दे हम कुछ नहीं बोलेंगे। हिना की आवाज हम वैसे ही खोज लेंगे जैसे सांई बाबा के महंगे शौक हमने खोज निकाले। कीमती परफ्यूम लगाकर भक्तों को दर्शन देने वाले, 5000 घडिय़ों का शौक रखने वाले, विदेशी साबुन, शैंपू,नैपकीन का इस्तेमाल करने वाले सांई की तरह अमेरिका भी बेचारा मजबूर है पाकिस्तान के सामने। अब देश से हिलेरी गयी नहीं कि हिना आयी। बेचारा अमेरिका पाक का कुछ भी बिगाड़ नहीं पा रहा। ठीक वैसे ही जैसे स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख के निर्देश पर सभी सिविल सर्जन अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि बाबा रामदेव का करेले व लौकी का जूस पीकर कितने लोगों की अब तक मौत हुई है। वैज्ञानिक की मौत का जांच इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च को सौंपा गया है। भई, मुरखों का जमाना है, क्या कीजिएगा। अब दलाई लामा ओबामा से क्या मिले, उन्हें चीनी नेताओं को मूर्ख कहना पड़ रहा है। खैर, हिना आई हैं पहली बार देश, तो हो जाइये आप भी तरोताजा करेले व लौकी का जूस पीकर।

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anuj के द्वारा
August 15, 2011

नीचे पोस्ट. आपका भी जवाब नहीं.

manik के द्वारा
July 28, 2011

With this heart-stopping collection Manoranjan thakur relentlessly personalizes the unstable social conditions of Indian Sub Continent.

shailendra के द्वारा
July 28, 2011

It is not merely the subject that makes your writing and article so astonishing, translucent, and horrifying all at once; it is the talent with metaphor and imagery thought, and your deep immersion into character and place for the particular thought and stonishing depth and states of mind procured behind that. Mr Thaur writes the artcle with such a political fierceness and a humanity so full of compassion it might just change the thought edge of Indian Politicians and Diplomats and thoughts(If they read this and implement the change which are needed for India)

    manoranjan thakur के द्वारा
    August 10, 2011

    really your thout is superv thanks

shailendra के द्वारा
July 28, 2011

I really appreciate this article and thought behind this. Its very rare these days to see journalists and media speaking a hard core truth in front of public which really is imapcting our life.

    manoranjan thakur के द्वारा
    August 10, 2011

    your opinion is really appricible

rajkamal के द्वारा
July 27, 2011

आदरणीय ठाकुर साहिब …. सादर अभिवादन ! आप हमारे मीडिया पर मत जाइएगा , यह तो पकिस्तान से भारत आने वाली हरेक हस्ती को चने के झाड़ पर चढ़ा देते है फिर अतीत में चाहे वोह मुशर्रफ ही क्यों न रहे हो ….. कोई कुछ भी कह ले + खुद को और जनता को बरगला ले लेकिन पाक के कठमुल्लाओ + सैनिक शासन + आंतकवादी संगठनों के उपर कोई भी नहीं जा सकता है …. इसलिए जमीनी हकीकतों को समझते हुए मेरी बात को समझे …. धन्यवाद :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/07/20/“नज़र-–निगाह-–देखना”-–-नमक/#comments

    shailendra के द्वारा
    July 28, 2011

    I agree with the above article and the conditon of life and thought prevaling in INDIAN sub continent. PaKistan and the terrorist group refreshing and nourishing their life in this part of the Indian Subcontinenet needs to have some harsh strategy and policies to be revised by the Govt of INDIA. India should take a step ahead to stop this in favour of the citizen of the INDIA aliging the World Politics and other major concerned power unions.

    manoranjan thakur के द्वारा
    August 10, 2011

    बात बहुत दूर की कही है बहुत बधाई

    manoranjan thakur के द्वारा
    August 10, 2011

    really shailender your view is perfect


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