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ये हलकट जवानी

Posted On: 6 Sep, 2012 Others में

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तस्लीमा भी उभार में है। वह पुरुषों की केंद्र में नाजायज खड़ी है। उसके पास शब्दों की बाजीगरी है। ताकतवर दिमागी सोच, समझ है। मारन, मोहन, स्तभंन, वशीकरण के मंत्र, सूत्र उसे बखूबी मालूम हैं। पता है, उसके पास शरम-व-हया का लज्जा नहीं है। वह उसी खुली किताब के पन्ने के मानिंद सामने है जिसे लोग चाव से पढऩे, सुनने, रसास्वादित करने की फिराक, ताक में रहते हैं। साहित्यक वर्ण, स्वर, व्यजंन, स्पर्श, उष्म की परिभाषा वह जिस तरीके परोसती है उससे ह्रस्व व दीर्घ उसके दैहिक अन्तस्थ से रिस कर पुरुषवर्गीय सोच के सामने निर्वस्त्र हलकट जवानी की तरह आज खड़ी है। मादकता, मारकता का जो अहसास तस्लीमा नसरीन को है उसे दूर-तलक निहारने को लोग स्वयं खड़े, मिल रहे हैं। सबसे अहम उसकी देह जो विमर्श को स्वयं, खुद आमंत्रित, विमोचित
करती हैं। ऐसे में यौन उत्पीडऩ की बात पहले ही स्वीकारोक्ति, सामने आ जानी चाहिए थी। उसके साथ छेड़छाड़ हुई। इस्मत पर किसी ने हाथ डाला, छूआ, एक क्षण स्पर्श को कोई मचल उठा। यह पुरुषत्व के स्वभाव में भी है और नारियों के फलसफा में भी। अब भला बांग्लादेशी लेखिका जैसी सेलेब्रिटी के साथ शर्मनाक हिमाकत, उत्पीडऩ सरीखे अमर्यादित व्यवहार कोई करीबी रिश्ते को बुनने वाला, साक्षात दैहिक रुप का विमर्श नियमित निहारने, महसूसने वाला ही तो कर सकता है। बात पुरानी है। घटना आज की नहीं बल्कि 1999 की है। यानी तेरह साल पूर्व उस उम्र की जुबानी जहां बांग्ला साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय व तस्लीमा नाजुक संबंध की डोर, उस मुहाने पर खड़े थे जब जवानी में हलकट हो जाना स्वभाविक, शौक में भी शुमार है। सुनील ने नसरीन पर तिरछी नजर डाली, वह भी आइपीएस अधिकारी नजरुल इसलाम की मुसलमानों पर केंद्रित पुस्तक पर पश्चिम बंगाल की पुलिस के हस्तक्षेप, कार्रवाई के बाद। आखिर उस नजरुल से तस्लीमा के क्या संबंध थे कि तस्लीमा को यह कार्रवाई इतनी साल गई। उसे यह बात इतनी खली, व्यथित, नागबार भला क्यों गुजरी कि तमाम लोगों से विरोध के स्वर अलापने, मुहिम चलाने की अपील पर वह आमादा हो गई। इसके बाद भी तस्लीमा जब कुछ बचा, शेष नहीं रख सकीं तो वही हथकंडा, जिसे महिलाएं हमेशा नस्तर, औजार के रुप में बेजा इस्तेमाल करना नहीं चूकती को पान कर लिया। वह ट्विट कर गई, सुनील किताबों पर प्रतिबंध व औरतों की गोश्त के आदी हैं।
दरअसल, महिलाएं फेसबुक की लत में हैं। इसके लिए उनका जीन जिम्मेदार है और इस जीन की पैमाइश तस्लीमा शुरू से ही कर, जान रही हैं। सो, तेरह साल बाद उसने इश्किया ट्विट कर नारीत्व को फिर से उसी रुप में परोस दिया जहां से वह निकलने की जिद में हैं। वैसे, विवाद में रहना, उसे समझना तस्लीमा को शुरू से भाता है, रहा है। निर्वासित जिंदगी उसने खूब, भरपूर जिए, जी भी रही हैं। वह उस हिंदुस्तानी मूल की
पाकिस्तानी नागरिक शर्ले यानी शबनम खातून से कम नहीं जो कराची में गुजरे तेरह बरसों से एक घर के महज एक छोटे से कमरे में बंदी पड़ी है। हां, यह इतर कि उस बंद अंधेरे कमरे में उसके साथ बेटियां भी घुट-घुट कर जी रही। तस्लीमा को तो खुली हवा मंजूर थी। ऐसे में कट्टरपंथों के विरोध के बीच उसने शरीर की भाषा, उसकी जरूरियात, उसे तोड़-मरोड़ कर कम्यूनिकेशन स्किल के तौर पर परोसने की हुनर वह सीखती चली गई। वह उस एकाकी पुरुषत्व की गंध को अपने जेहन का लिहाफ बना डाला जिसकी गरमाहट आज सबसे बाबस्त है। वह बिपाशा की तरह उस खुली जीप पर सवार है जिसमें बेवजह नायिका अपने संपूर्ण नंगे पैर को उठाकर बैठी है और जॉन उसकी मखमली श्वेत पैरों पर उंगलियों का जादू चलाता गाड़ी ड्राइव कर रहा है। जोश, उफान में बिपाशा अपने खुले शरीर का समर्पण कर नायक को अपने जिस्मानी तारत्मय से बांध, पाश लेती है…और वह जीप सरपट दौड़, निकल पड़ती है दर्शकों की सनसनी को रिसने। अब देखिए ना, वीना मल्लिक के बाद एक और पाकिस्तानी बाला, पाक की खूबसूरत हसीन मॉडल मेहरीन सैयद भी जल्द ही हिंदी फिल्मों में एंट्री लेने वाली है। संभलिए, आज स्त्रीतत्व अफसोसनाक हालात में है। स्त्रीत्ववादी द्विखंडिता से बाहर निकलने की छटपटाहट में चाहे विधा कोई भी हो औरत तेरी कहानी वही है, यही है।

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61 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mass steroid cycle के द्वारा
October 19, 2013

Manoranjanthakur.jagranjunction.com पर अपने ब्लॉग पोस्ट ही एक और लेख के लेखक के रूप में प्रस्तुत है, लेकिन मैं बहुत अपने अब तक बेहतर पसंद करता है.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
September 22, 2012

अब क्या कर सकते हैं. सुन्दर लेख बधाई. आदरणीय मनोरंजन जी, सादर अभिवादन के साथ.

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 22, 2012

    आपका तहे दिल से स्वागत आभार माननिये

D33P के द्वारा
September 11, 2012

मनोरंजन जी नमस्कार .आपके नाम की तरह आपके ब्लाग के शीर्षक भी मनोरंजक है ! तसलीमा के लेख यदा कदा हमने भी पड़े है हमेशा ही यही लगा कि इनकी लेखनी प्रभावी है !हो सकता है वो जो निर्वासित जिन्दगी जी रही है उनके लेख उसी का परिणाम हो .!इंतनी गहरे से इनके बारे में जानकारी नहीं थी जो आपने लिखी है ! वैसे सही लिखा आपने लोग खुद को बचाने के लिए दुसरे पर हावी होने की कोशिश करते है ( जिसे महिलाएं हमेशा नस्तर, औजार के रुप में बेजा इस्तेमाल करना नहीं चूकती)ये बात केवल महिलाओ पर ही नहीं हर गलत मानसिकता वाले इंसान पर लागु होती है !वैसे आज बहुत महिला चरित्र है ,जो पूरी स्त्री जाति के स्त्रीत्व पर प्रश्न चिन्ह लगाने पर मजबूर कर देते है ! आपकी लेखनी लाजवाब है !बधाई

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 12, 2012

    आपको धन्यवाद तीन बातो के लिए पहला …. प्रतिक्रिया दूसरा ……. मेरे नाम के सलीके शीर्षक तीसरे ………लेखनी को सराहने के लिए ………………………. एक बात दिव्या जी ……… महिला बिरोध में नहीं लिखता बस बस्तुसिथिति से अबगत करने की कोशिश होती है आपका एकबार फिर से आभार

    D33P के द्वारा
    September 12, 2012

    पहली बात हम दिव्य (दिव्या ) नहीं है , हम तो छोटी सी दीप्त(दीप्ति) है ! दूसरी बात हमने ये तो नहीं कहा कि आप स्त्री विरोधी है ! आपने बिपाशा के खुले शरीर के समर्पण की बात तो लिख डाली पर नायक की लालसा का क्या ? क्या इसके लिए एक पक्ष ही जिम्मेदार है ? वैसे आज के सामाजिक हालत वास्तव में बहुत ख़राब हो चले है कुछ मीडिया का योगदान भी है इसमें ,,कुछ प्रशासन की लापरवाही !अभी हाल ही में दिल्ली में जब असामाजिक तत्वों ने एक लड़की की अस्मत पर हाथ डाला ,तो उस लड़की का सवाल था कि दिल्ली में क्या कोठे ख़तम हो गए है ?राजधानी में जहा सारा प्रशासन है वहां ये सवाल कितनी शर्मिंदगी भरा है ? प्रशासन अपनी मौज में है जनता बेबस ! और सही में जनता बेबस कम सवेंदनहीन ज्यादा है (गुवाहटी केस ) आपका नाम मनोरंजन किसने रखा ?बुरा मत मानियेगा ये मजाक है ….आभार

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 12, 2012

    शायद नाम गलत लिखने की बात मैने दोबारा की है इससे पहले भी मैने आपका नाम दिव्या ही लिखा था इसके लिए मै हार्दिक क्षमाप्रार्थी हु ………..रही बात स्त्री विरोध की तो वो इसलिए की कही कोई गलत्फैमी ना हो आपकी सोच जिस उचाई की है निश्चित मुझे उसपर गर्व व अभिमान है आप यूँ ही मर्गार्शन देते रहे इसी आशा व कामना के साथ आपका तहे दिल से शुक्रिया बहुत आभार दीप्ती जी ||||

Chandan rai के द्वारा
September 10, 2012

manoranjan जी , एक बेहतरीन लेख के लिए हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारें !

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 10, 2012

    श्री चन्दन भाई हार्दिक बधाई धन्यवाद

aman kumar के द्वारा
September 10, 2012

बधाई हो भाई ! बहुत अच्छा विषय चुना है आपने ! आजादी का मतलब खुलापन बधाई हो भाई ! बहुत अच्छा विषय चुना है आपने ! आजादी का मतलब खुलापन तो हो सकता है पर नगापन नही .तो हो सकता है पर नगापन नही .

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 10, 2012

    shri aman bhai sahi farmaya hai nangapan li ijajat lisi ko nahi di ja sakti bahut sadhubad

yogi sarswat के द्वारा
September 10, 2012

उस खुली जीप पर सवार है जिसमें बेवजह नायिका अपने संपूर्ण नंगे पैर को उठाकर बैठी है और जॉन उसकी मखमली श्वेत पैरों पर उंगलियों का जादू चलाता गाड़ी ड्राइव कर रहा है। जोश, उफान में ….. श्री मनोरंजन जी , नमस्कार ! जैसे चाक चलाने वाला कुम्हार मिटटी को खूबसूरत shape दे देता है , उसी तरह आपकी कला है ! आप एक पंक्ति की खबर को इतना रंगीन , इतना दिलचस्प बना देते हैं की बस तारीफ निकलती है !

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 10, 2012

    श्री योगी भाई आपने जो तारीफ की उस काबिल मै हु नहीं बस मार्गदर्शन देते रहे टोनिक का काम करता है बहुत आभार

chaatak के द्वारा
September 8, 2012

स्नेही मनोरंजन जी, सादर अभिवादन, जिस प्रकार पौरुष बिना पुरुष कुछ अजीब सी चीज़ होता है उसी तरह स्त्रीत्व बिना स्त्री भी बड़ी बेढंगी चीज़ होती है| कमोवेश वे सभी बलाएँ जिनका आपने यहाँ पर जिक्र किया वे उसी तरह की बेढंगी चीज़ें है, स्त्रियाँ नहीं| अच्छी पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 9, 2012

    सर्बथा उचित कहा आपने स्त्रिया बेढंगी हो जाएँगी हमारा इस समाज का विकाश ही रूक जायेगा बस कुछ चीजे है ………… बधाई के लिए तहे दिल से आभार

rekhafbd के द्वारा
September 8, 2012

मनोरंजन जी ,आधुनिकता का अर्थ अश्लीलता नही है ,आपके आलेख से मै सहमत हूँ ,आधुनिक नारी को अपने आचरण से अश्लीता को दूर रखना चाहिए ,आभार

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 8, 2012

    आपकी सराहना के खास मायने है तहे दिल से साधुबाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 8, 2012

उस खुली जीप पर सवार है जिसमें बेवजह नायिका अपने संपूर्ण नंगे पैर को उठाकर बैठी है और जॉन उसकी मखमली श्वेत पैरों पर उंगलियों का जादू चलाता गाड़ी ड्राइव कर रहा है। जोश, उफान में .. मनोरंज भाई बड़ी अच्छी समीक्षा और दृश्य दृष्टांत ..समय सात घोड़ों की जगह अब मिसाइल और राकेट पर घूमने लगा और युवा वर्ग तो …. जय श्री राधे भ्रमर ५

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 8, 2012

    श्री भमर भाई जिन उद्धरण को आपने इसमें समाबेश किया है कमाल है बहुत आभार धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
September 8, 2012

संभवतः तस्लीमा जी के जीवन का यह दूसरा पहलू है। मैं इससे इस आलेख को पढ़ने से पूर्व तक अनभिज्ञ था। मुझे लगता यह पहलू गौण हैं। उन्होंने अपनी लेखनी से जो मुद्दे उठाये हैं वह बहुत  सराहनीय एवं साहसी हैं। एक नारी द्वारा कठमुल्लों के विरुद्ध लिखना बहुत ही वीरता का कार्य है।

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 8, 2012

    निसंदेह श्री दिनेश भाई तसलीमा ने गजब साहस का परिचय दिया मगर ……………..! बहुत बहुत आभार .

akraktale के द्वारा
September 7, 2012

आदरणीय मनोरंजन जी                          नमस्कार,तसलीमा द्वारा १३ वर्ष पुराना मामला उठा कर विवादों को जन्म देना और विवादों में बने रहना. शायद यह उनके लिए अब जरूरी हो गया हो. एक घटना में अपने कार्यालय के वाहन चालक की बताना चाहता हूँ जिसने अधिकारियों पर कई केस किये और सबको परेशान कर दिया अंत में वह वापस नौकरी पर आ गया जब मैंने उससे कहा की अब तो तुझे अधिकारियों द्वारा परेशान किया जाएगा तो उसने बताया की वह रिटायर्ड होने तक कोई ना कोई केस इनके विरुद्ध करता ही रहेगा. बस यही तरीका तसलीमा भी अपना रही है.

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    बहुत ही बाजिव कहा है श्री अकेले भाई कुछ लोगो की यही आदत होती है बहुत आभार

drbhupendra के द्वारा
September 7, 2012

कल से प्रशंशा लिखने की कोशिस कर रहा हु …पर आज जाकर सफलता मिली है..सुन्दर लेख… स्त्रीत्व का विकाश जब गलत दिशा में जाएगा तो माहौल अफ़सोस जनक ही होगा ..

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    डॉ saheb आपकी हर बात मेरे लिए प्रसंसिनिये है बस स्नेह बनाये रखे आभार

vinitashukla के द्वारा
September 7, 2012

मनोरंजन जी, जहां तक मुझे ज्ञात है; तसलीमा नसरीन ने मुल्ले -मौलवियों के समाज और उनके संकुचित तौर तरीकों पर बेहद सटीक और चिंतनीय प्रश्नचिन्ह खड़े किये हैं( खासतौर पर स्रियों के प्रति संकीर्ण दृष्टिकोण पर). उनकी लेखनी में दम भी है( जैसा आपने खुद स्वीकार किया). आपके इस लेख से, उनके व्यक्तित्व के दूसरे पक्ष के बारे में पता चला. आपकी भाषा- शैली बहुत समर्थ और प्रभावी है. आपकी इस बात से मैं बिलकुल सहमत हूँ कि नारी को विख्यात होने के लिए, सनसनी फैलाने और ओछे व्यवहार से बचना चाहिए. सामाजिक विषयों के अतिरिक्त, यदि आप राजनीति पर भी कुछ लिखें तो अच्छा होगा. धन्यवाद.

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    आदरणीय विनीता जी तसलीमा के बारे में आपके विचारो से सहमत हु राजनीति पर भी लिखा है स्कर्ट की बिरयानी भी राजनीति पर ही है मगर सामयिक घटनाए मुझे ज्यादा पसंदीदा विषय है एक बात और मै नारी विरोध की बात नहीं करता बस उस अश्लीलता का विरोधी हु जो आज सरेआम है अगर महिला विरोध कही मेरे ब्लॉग मै दीखे तो कृपया माफ़ कर देंगे आप ने बहुत दिनों बाद सराहा इसके लिए धन्यवाद

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 7, 2012

उमदा लेख, बधाई।

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    श्री भानुजी आपका तहे दिल से सुक्रिया

jlsingh के द्वारा
September 7, 2012

ठाकुर साहब, नमस्कार! अब मैं क्या लिखूं … आपकी शैली !!! तसलीमा की कुछ कहानियां मैंने भी पढ़ी हैं… आपका सन्देश जायज है … अब भारतीय नारियों को सोचना है कि वे नारी सुभाव का आचरण करें या पुरुषों से कन्धा मिलाकर आगे बढ़ें!

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    सिंह साहेब महिलाए आगे बढती है तो देश का भला होगा लेकिन समाज तो सोचे बहुत बधाई आपको

Rajesh Thakur के द्वारा
September 6, 2012

बहुत सुंदर ,धन्यवाद्

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    बड़े भाई आप सराहते है तो अलग ही मजा……….. थैंक्स

deepti के द्वारा
September 6, 2012

very true , good one mr thakur

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    दीप्तिजी सराहना के लिए आभारी

harpreet के द्वारा
September 6, 2012

kya baat hai sir , bahut sahi likha aapne ………

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    हरप्रीत जी आप हमारे साथ बने रहे धन्यवाद

arpitha के द्वारा
September 6, 2012

aapki ek bahut achhi kosis , likhte rahe ……

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    आपलोग जिस सनेह के साथ होसला बढाया है बहुत आभारी हु

aakash के द्वारा
September 6, 2012

kya baat hai sir , really very true

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    धन्यबाद आकाशजी बहुत दिनों बाद मेरी याद आई

anshul के द्वारा
September 6, 2012

i always like the subtitle of your article , once again very entertaining

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    i always like to entertain my reader as my name too

anshu के द्वारा
September 6, 2012

good one sir ………….

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    lot of thanks anshuji

sahana के द्वारा
September 6, 2012

nice post ……

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    आदाब अर्ज है सहाना जी सुक्रिया

smridhi के द्वारा
September 6, 2012

very intresting …………….

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    थैंक्स जो आपने समय निकाला

vikramjitsingh के द्वारा
September 6, 2012

सत्य वचन…….प्रभु……अक्षरक्ष सहमती……. जब आपने कह दिया तो यही होगा……… सादर…….

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    श्री विक्रम भाई हार्दिक साधुबाद

sneha के द्वारा
September 6, 2012

bahut achaa , kaffi manoranjak ……………..

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    again thanks snehaji

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
September 6, 2012

ठाकुर जी बिलकुल ठीक भविष्य की चिंता की है आपने बहुत अच्छे विषय पर लिखा है ,,,आने दो उसे भी देखे

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    धन्यवाद सिरजी जरूर पढूंगा

rajat के द्वारा
September 6, 2012

श्री ठाकुर जी तसलीमा की लज्जा बहुत चर्चित हुई अब जोर्जूउस तो वो है ही बढ़िया लेख

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    सराहना के लिए सुक्रिया

rajeev mishra के द्वारा
September 6, 2012

पाक के हालात खराव है बहा की हिरोइन इंडिया में आना चाह रही है जो बुरे परिणाम देंगे फिर से सानदार

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    आपका सुक्रिया

abhay के द्वारा
September 6, 2012

सरजी तसलीमा यही चीज है धमाकेदार लिखा है आपने

    manoranjanthakur के द्वारा
    September 7, 2012

    आपको बहुत बधाई


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