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मामा...नाना, हर शतक अब सचिन के नाम

Posted On: 16 Nov, 2013 Others में

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कांग्रेस, जदयू, भाजपा के त्रिकोण में पड़ता इंडियन मुजाहिदीन। लोकतंत्र के दरवाजे खोलते छत्तीसगढ़ में पड़े 72 फीसदी वोट। अर्थव्यवस्था में मिलते सुधार के संकेत। बढ़ते निर्यात। व्यापार घाटे में आती कमी। शटडाउन के बाद मंदी से उभरता अमेरिका। यूरोप में पकड़ता जोर और पस्त होते भारत के हालात। राहुल को संयम बरतने की सलाह और डंडे बरसाते चुनाव आयोग नरेंद्र से जवाब-तलब करती। खूनी पंजे में फंसते मोदी। व्यक्तिगत हमले करते। मां बीमार है तो बेटे को काम पर लगाओ। मामा से पैसे लाए हो क्या। अरे देखते क्या हो, लता से सम्मान वापस मांगने वालों से उनकी जमीन छीन लो। और पीछे पड़ती कांग्रेस उलट मामा का जवाब नाना से देती।
मुंबई में सचिन को आखिरी बार देखने उमड़ती भीड़। पांच सौ की टिकट 5 से 15 हजार में काली होती, बिकती। मुंबई जिमखानों की संलिप्तता के बीच टिकट खरीदने के लिए बने वेबसाइट का हैक, उसका नहीं खुलना। पंद्रह ही घंटे में आम लोगों के लिए वानखेड़े स्टेडियम के बंद मिलते दरवाजे। मायूस घर लौटते भगवान के प्रेमी। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर माथा पच्ची करती पार्टियां और कन्नी काटती उस पचड़े से, खुद को पीछे देखने से दूर भागती कांग्रेस। गोया, जावेद मियांदाद सचिन को यूं देश में सम्मानित होता देख मिर्ची खा ली हो या उस सत्कार को नहीं पचा पाने का मलाल लिए। सीबीआइ के औचित्य पर सवालों के बीच आम आदमी पार्टी को 16 करोड़ का चंदा देख भड़के भाजपाई। आवाज से हुई फीडिंग की आवाज बुलंद करते सुबमण्यम स्वामी। वहीं जांच के आदेश देते शिंदे और 25 नवंबर का इंतजार। जब देश के सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री आरुषि-हेमराज मर्डर में आएगा फैसला। फंसते दिखते तलवार दंपती। सामने, कक्षा से बाहर निकलने की प्रक्रिया पूरी करते मंगलयान। वहीं नेहरू-पटेल विवाद को उठाते आडवाणी उसी सरीके हड़बड़ी में मानो, युवाओं की टोली बेकरार, बेताब दिखे 11/12/13 पर शादी रचाने। या फिर, ब्रिटेन के पीएम कैमरन मोदी से मिलने की चाहत पाले। ये तो थे अब तक के समाचार…अहम यह, मदरगुड इन चाइल्ड हुड की रिपोर्ट चौंकाती हैं। हर साल मां बनने वाली महिलाओं में साराजहां 73 लाख लड़कियां 18 साल से कम उम्र की हैं। कम उम्र में गर्भधारण से 10 से 19 वर्ष की करीबन 70,000 लड़कियां हर रोज जान गंवा रहीं हैं। ऐसे में, फारेंसिक विभाग की रिपोर्ट में उलझती अभिनेत्री जिया खान की मौत और कब्र से शव निकालने की तैयारी के बीच जिया के नाखून में इंसान के मांस के मिलते टुकड़े व इनरवियर में खून के निशान चौंकाते, चिंता को स्वभाविक विवश करते। साफ संकेत देते, इन दिनों पुरुषिया ही नहीं स्त्रीत्व अपराधवाद से जुडऩे के आंकड़ें गवाह बन रहे कि महिला अपराधियों की संख्या के मामले में यूं ही महाराष्ट्र तीन वर्षों से शीर्ष पर नहीं है जहां, 57406 महिला अपराधियों की गिरफ्तारी, आंध्र प्रदेश 49313, तमिलनाडु में 49066 से क्यूं आगे है। बात हो रही है उस देह की जिसके पीछे समाज का एक वर्ग पागलपन की हद, तमाम बंदिश को तोडऩे पर आमादा है। इस हड़बड़ी में कहीं बेटियां जन्म लेने से पहले मारी जा रही हैं। कहीं आनर किलिंग की कशमकश सामने है। कहीं महिलायें बलात्कार की शिकार हो खुद मरने को विवश, लाचार दिखती है। रिश्तों के ताने टूटते बिखरते नजर आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एक युवा वकील जो उन्हीं के अंदर इंटर्रशिप कर रही थी के शरीर में समा जाते हैं। मगर एक सवाल छोड़कर…। वकील अपने ब्लॉग में लिखती हैं, दिल्ली में दामिनी को इंसाफ के लिए प्रदर्शन हो रहे थे, वह पुलिस के बैरिकेट्स को तोड़ते हुए भाग रही थी थककर कद्दावर जज के पास पहुंची मगर कहां, एक होटल में। जहां लोगों ने उन्हें सहज आते-जाते देखा। घटना 24 दिसंबर की है और जांच के लिए तीन जजों की समिति बनती है 12 नवंबर को। आखिर, करीब एक साल बाद खुद की देह का सार्वजनिक करना किस मजबूरी, परिस्थिति या चाहत में यह सवाल जेहन को कुरेद जरूर रहा। अहम यह भी, बसपा नेता धनंजय सिंह पुराने इश्कबाज ही नहीं यौन शोषक भी हैं। यह रेलवे में कार्यरत महिला ने कबूला है कि सांसद दुष्कर्मी भी हैं। मगर समानता देखिए, ये रेलवे की महिला वर्ष 04 से 09 तक यौन कुंठा में सांसद की बिस्तर की साक्षी बनती रहती लेकिन मुंह खोला 14 नवंबर को जब धनंजय व उनकी बीवी जागृति नौकरानी को प्रताडि़त करतीं जेल में मिलती हैं। भले पूर्व आइपीएस किरण बेदी मलाला की हिंदी में छपी जीवनी का लोकार्पण करते सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा को बुजदिल कहे पर क्या ऐसे में, सीबीआइ निदेशक की बात सही नहीं जंचती, मजा लो…। ऑल इंडिया रेडियो के एफएम गोल्ड चैनल में काम करने वाली महिला कर्मियों के साथ शीर्ष अधिकारी यौन शोषण करते हैं, यह बात केंद्र सरकार ने खुद कबूल कर साफ संकेत दे दिए हैं, यौन प्रताडऩा पर कानून की बात आज बेमानी हो चली है। बिहार के सारण में एक रिटायर्ड फौजी अपनी ही छह साला पोती के साथ चार माह तक रुपए व चॉकलेट का लोभ देकर यौन शोषण करता मिलता है। मुजफ्फरपुर के उत्तर रक्षा गृह में भूली-भटकी लड़कियों से देह व्यापार करवाया जाता है। भले, बिहार महिला आयोग संलिप्त प्रभारी वार्डन व सुरक्षाकर्मी को पकड़ भी लिया हो मगर दोनों हैं कौन? वही स्त्रीदेह जिसका साथ होमगार्ड जवान देता इन लड़कियों का गर्भपात करवाते अस्पतालों में दिखता, मिलता है। नारायण साई की गंगा-यमुना से ही नहीं कई प्रदेशों में उनके अवैध संतानें अपने भगौड़े बाप की याद में आंसू बहा रहे हैं। जयपुर के एक निजी कंपनी के सीईओ के साथ कंपनी के मालिक ने दोस्तों के साथ मिलकर गैंगरैप किया। सीईओ संगीता खुद को संभाल नहीं पायी और खुदकुशी को तलाश ली। रामपुर के एक अदालत ने ऑनर किलिंग में एक बाप को सजा-ए-मौत की सजा सुनायी है। उस बेबस, कमजोर बाप को अपनी बेटी जो खुद की मर्जी से शादी करना चाहती थी कि बात रास नहीं आयी। बात ईमान की हो रही है। घर की चौखट से बाहर निकली लड़की फिर उसी दहलीज में वापस लौट जायेंगी आज के हालात में कहना बहुत मुश्किल। आज भी महिलाओं के सामने उसका देह शोषण, अत्याचार के खिस्से सुना रहे हैं। गद्दाफी ने लोकतंत्र समर्थक महिलाओं के खिलाफ इसी देह को हथियार बना डाला। लोकतंत्र समर्थक महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने के लिये अपने सैनिकों को वियाग्रा जैसी सेक्स दवाइयां मुहैया करवायी। इतर प्रश्न कि महिलायें कहीं खुद सेक्स सिंबल के सहारे तो जमीनी लड़ाई लडऩे के मूड में नहीं है। लड़कियां हर क्षेत्र में अगुआ बन रही हैं लेकिन भोग्या के रूप में उसके चरित्र में कहीं कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा। वह आज भी दैहिक सुख की एक सुखद परिभाषा भर ही है। जमाना बदला है। ब्रिटनी सर्वश्रेष्ठ समलैगिंक आइकान चुनी जाती हैं। शहरी संस्कृति में नित नये प्रयोग हो ही रहे हैं। यहां का रिवाज अब गे हो गया है। स्पेन से आये समलैगिंक जोड़े ने दिल्ली में किराए की कोख सेरोगेट मदर की मदद से जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है। नौ सेना के अधिकारी रूसी वाला के साथ आपतिजनक तस्वीरों में दिख रहे हैं। रक्षा मंत्रालय ने कमोडोर सुखविंदर सिंह को हटाने का फैसला कर नैतिक रहने का संकल्प दोहराया लेकिन हम, हमारा समाज कितने अश्लील होते जा रहे हैं इसकी बानगी से हर रोज रू-ब-रू होने का मौका मिल ही जा रहा। रामलीला के नाम पर अश्लीलता परोसने और कई संगठनों के विरोध ने जबलपुर हाईकोर्ट को भी सोचने पर मजबूर करता भले मिले लेकिन हकीकत, यह देश यही है, समाज भी यही जहां प्याज, आलू के साथ नमक की कीमत सौ रुपए महज अफवाह व कालाबाजारी से बिक रहे हैं। अंत में, सचिन, अपने अंतिम टेस्ट को भी बाजारवाद के भेंट कर चुके हैं जिसमें भावनाएं अरब के इस शहंशाह को कारपोरेट जगत में सदा जिंदा रखेगा और तेंदुलकर का ड्रेस पहने भारतीय क्रिकेटर जब भी भविष्य में शतक खड़ा करेंगे वो भी सचिन के ही नाम होगा यह भी तय है-
अब मैं कोस रहा हूं खुद को, मेरा किसी से क्या झगड़ा है

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
November 18, 2013

आदरणीय मनोरंजनठकुर जी,लेख में व्यंग्य भी है और सच्चाई भी है.अच्छे लेख हेतु बधाई.


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