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ये देसी हवन कुंड

Posted On: 3 Apr, 2015 Others में

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सरकार हमारी हो। आप की हो। गैर या पराए की। दुष्कर्म के कर्म कांडी/ दस बच्चे पैदा करने से लेकर रइसजादे/ हरामजादे के मोड़ पर उसी शक्ल/ सूरत में
विधिवत देहवाद परोसे/ उसी का मोचन / पाठ करते/ मुंह में वाक्यों के विन्यास/ सीने में उन्माद/ हिंदू-मुस्लिम फसाद की जड़/ लसलसाहट में/ उस
देह की नुमाइश करते/ झाग बहाते/ फैलाते/ बांटते/ यज्ञ-होम करते खड़े मिल रहे जहां गांधी को नकारने/ विदेशी एजेंट कहने/ शहीदों को अपमानित/
दुत्कार/ टेरेसा के मातृत्व पर सवाल/ योगेंद्र-प्रशांत को बाहर निकलने का रास्ता तलाशते/ दिखाते/ युवराज की फरारी के पोस्टर सीने पर चिपकाए/
उन्हें मलेेशियाई एयरलाइंस के लापता विमान कहने/ आमिर/ शाहरूख/ सलमान की रंगीन दीवारों पर चस्पी तस्वीरों की होलिका जलाने की मातमी धुन में उसी नुक्कड़/ चैराहे/ उसी गली/ उसी मोड़/ उसी घरों के बंद / खुले/ निस्तब्ध वातावरण में सामूहिक देह/ लज्जा/ शर्म/ हया/ बेशर्मी को कपड़ों से पोछते/
गांठ खोलते/ उधारते/ चमड़ी देखते/ दुष्कर्म सरीखे स्वच्छ कर्म की बंदिश/ लक्ष्मण रेखा लांधते/ नसों की फड़फड़ाहट/ सनसनी/ उस झुरझुरी को तलाश रहे
जिसकी मर्यादा/ कोई डोर/ कोई जात-धर्म-मजहबी लगाम/ कोई उम्र अब नहीं होती/ दिखती। कब/ कहां/ कौन/ किसे/ किस वक्त/ किस लम्हा/ कब दबोच/ सुला
दे/ हवन पजार/ सुलगा दे/ उस अग्नि में निस्तब्ध/बांध/ अधमरा छोड़/ लेटा जाए /कहना/ बतलाना/ सुनना मुश्किल।
मोतिहारी में एक साठ साला बुजुर्ग को देहवाद महसूसने/ उसकी फड़फड़ी में बहकने का अहसास जागा। उस बुजुर्ग/ /रवानी ने बलात सत्कार के इस कर्म में
किस उम्र को चुना महज सात साला को। बुजुर्ग की नसों ने देह की ऐसी ऐंठन उस अंगीठी में पजारी/हवन कुंड में लहकी/ बहकी/ आग क्या पजरी/ सुलगी छोटी
सी बच्ची उसमें अर्पित /स्वाहा हो गयी। जिसने अभी-अभी जिंदगी के कदम चूमे थे/ पांव पसारा था। छोटी/ मुस्कुराती/मासूम जिंदगी में उस बुजुर्ग की लहू
ने ऐसा रिसाव/ जख्म भर दिया जब जलकर वह बाहर निकली उस बुजुर्ग केदार साह ने बीस रुपए दिए, कहा किसी को मत बतलाना/ बस, मेरी वासना की आग की महज अब तू धुंआ बनकर ता उम्र उसमें सालती/अपनी शरीर को निहारते रहना। मोतिहारी के ही सुगौली मुसवा गांव में एक किशोरी से सामूहिक देह मोचन के बाद चमड़ी के पुजारियों ने उसे जहर का प्रसाद खिलाया। ये वही पुजारी थे जिसकी प्रेम अगन में वह लड़की जल रही थी। उस दुष्कर्मी से उसके प्रेम की पींगे जवां हो रहे थे जो बलात अपने साथियों के साथ उसे बिस्तर पर धकेल दिया। कराह पर नींद टूटी/ जागा तो ये बिहार के कुछ आजकल के खिस्से जो कभी खत्म नहीं होने की जिद लिए हर रोज त्रिया चरित्र के फंसाने अजीब शक्ल में खड़े/ धूमते/ फरोसी करते मुजफफरपुर के ब्रहमपुरा गफूर बस्ती हजरत अली लेन पर मिल गए। वहां छठी वर्ग की किशोरी दूध लेने घर से सोनारपटृी क्या निकली घसीट ली गयी पास ही के निर्माणाधीन रेलवे क्वार्टर में। जहां उसके मोहल्ले के ही चार यज्ञकर्ताओं ने उसके साथ सामूहिक हवन की पूर्णाहुति दी। दो दिनों तक उसकी शरीर काली-सफेद धुंए की गंध से कुछ बोल ना सकी। जब मुंह खुला तो पूरे परिवार ने उस यज्ञ की आरती ली। थाने जाकर प्रसाद वितरित/ ग्रहण किया। बात यहीं खत्म नहीं होती। उत्तर प्रदेश पहुंच गयी। कटरा सआदतगंज मूसाझाग सामूहिक दुष्कर्म यज्ञ का समापन हुआ नहीं कि बंदायू धुंआ-धुंआ हो गया। बदायूं के गरीफनगर में खेत पर गयी दो नाबालिग चचेरी बहनों को दबंगों ने असलाहों के बल पर नदी किनारे बंधक बनाकर सामूहिक यज्ञ का हवन कुंड पजार बैठ गए। बात वही हो गयी। अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के संस्कार/ उनकी जरूरत/ उनकी सोच/ देह की भाषा उसके कथ्य/ शिल्प /मर्यादा/ शादी से पहले और शादी के बाद के सेक्स को महसूसने लगी। कहती हैं, माई च्वाइस समय की मांग/ जरूरत है। ढाई मिनट के इस श्रव्य/दृश्य ने करोड़ों लोगों की सुर्खियां मिनटों में बंटोर ली। महिला सशक्तीकरण के मायने/मतलब को
बेशर्म कर दिया जिसमें/ इच्छा से शारीरिक संबंध/ विवाहेतर रिश्ते/ टटोलना/ बनाना/ मनचाहे कपड़े पहनने की आजादी उसके कर्तव्य/ अधिकार/समर्पण
में शुमार है। महिलाओं को ताकत /रोजगार/ सृजनात्मकता को समृद्ध बनाना उसे विस्तारित करना कतई नहीं। यकीनन, यूपी के विधायक शिवचरण
प्रजापति की बातों में दम कि महिलाएं खुद बलात्कार के लिए बहकती/बहकाती हैं। वजह सही, सफेद/ गोरी चमड़ी के सवाल पर शरद यादव को संसद के भीतर
घेरती शिक्षा मंत्री स्मृति इरानी हाथ जोड़े बोलने से टोकती/ रोकती मिलती/ दिखती है वहीं गिरिराज को सोनिया की गोरी चमड़ी उनके लिए पद दायक
दिखती/लगती है जिसके भरोसे/ बूते वह कांग्रेस की अध्यक्ष बनी बैठी है। ये तो उस हवन का फलसफा था जिसे राजीव गांधी ने नाइजीरिया की जगह इटली को
चुना। वर्ना कांग्रेसियों को आज राहुल को नकारने और प्रियंका को बुलाने की नौबत ही नहीं आन पड़ती। इसका असर पाकिस्तान पर भी नहीं पड़ता जहां
बेनजीर के पुत्र विलावल की बात उनकी पार्टी में कोई नहीं मान रहा मानो वह राहुल की कांग्रेस हो। फलसफा, विलाबल की बहन बख्तावर पीपीपी पार्टी को बचाने/ पाकिस्ताान की आवाम उनकी पार्टी समर्थकों की इच्छा नहीं बनती गोया प्रियंका लाओ कांग्रेस बचाओ की मांग भारतीय कांग्रेस के अंदर/ मथ/ दिख रही। वैसे, तुम उन सालों को नहीं जानते। बडे कमीने हैं साले…जैसी संस्कृति राजनीति का हिस्सा आम हो रही जहां ठुमके लगाने वाली से लेकर पागलखाने तक भेजवाने का खर्चा देने को राजनेता सहज तैयार दिख रहे। लिहाजा, एक अप्रैल को फेंकू दिवस के नाम पर प्रधानमंत्री को लाॅलीपाप खिलाते कांग्रेसी और अप्रैल फूल दिवस पर केजरीवाल के बड़े-बडे़ पोस्टर दिल्ली की सुर्खियां नहीं बंटोरते। हालात यही, दस महीनों में दाग नहीं लगने की उड़ीसा में ढोल पीटते
प्रधानमंत्री को प्रतीक्षा की मौत कतई से भी नहीं सालती नजर आयी। आखिर उस चार साला बच्ची की गलती क्या थी। क्या यह जानने की कोशिश कभी नरेंद्र
मोदी सरकार करने की कोशिश करेगी या की। मुंबई से पचास किमी दूर पनवेल में चार साला प्रतीक्षा को कुत्तों ने इस वजह नोंच-नोंचकर मार डाला क्योंकि
वह खुले में शौच करने गयी थी। उसके पड़ोस में 21 परिवारों के बीच महज चार शौचालय थे। हकीकत जानने के लिए फुर्सत किसे कि 60 फीसदी पूरे विश्व में
सिर्फ भारतीय हैं जो खुले में शौच करने के आदी हैं। यकीनन, आजादी के 68 साल बाद भी 48 फीसदी लोग शौचालय नाम की चीज नहीं जानते। 50 करोड़ लोग आज भी खुले में शौच कर रहे। दस करोड़ शौचालय के टारगेट लेकर चली मोदी सरकार के हिस्से में क्या परवेल का वह इलाका भी शामिल था जहां प्रतीक्षा आज भी मौत का जवाब/ सबब/ ढूंढती़/ पूछती खड़ी/ प्रतीक्षारत है। सवाल तो तंबाकू के खिलाफ जंग लड़ती पोस्टर गर्ल सुनीता ने भी प्रधानमंत्री से पूछे थे वो भी मौत से महज/ चंद दो दिन पहले। कहा था, प्रधानमंत्री जी…तंबाकू से कैंसर होते हैं। बीड़ी/सिगरेट/ गुटखे पर सिनेमा/टीवी के विज्ञापनों में
तंबाकू की दर्द बयां करती/चेतावनी देती /तस्वीर का आकार चालीस से अस्सी फीसदी कर बड़े आकार में छापिए/ दिखाइए। मगर ये क्या प्रधानमंत्री
जी…आपके मंत्रालय के दिलीप साहेब क्या कहते हैं सुनिए…भारत ने कोई ऐसा रिसर्च ही नहीं किया जिसमें साबित हो कि तंबाकू से कैंसर होते हैं।
अब विदेश के रिसर्च/वहां के शोध/ आपको रास नहीं आते। आपकी शिक्षा में तो यूजीसी में कई खांमियां दिख रही अब शिक्षा की मुश्किलों से बचने के लिए
नेशनल हाॅयर एजुकेशन आथॅरिटी की हवन करने की जरूरत है। अरे आपने एक दिन की टृ्रेन की यात्रा क्या की लेटलतीफी पर प्रभु को डांट पिला दी। उन्हें
इमरजेंसी तक की याद दिलाकर कांग्रेसियों को खुश कर गए/इंदिरा का चेहरा सामने ला दिया। अब प्रभु को नीति आयोग भेज दीजिए यही बेहतर होगा। रेलवे
का हवन उनके वश की बात नहीं या फिर अब देबराॅय कमेटी भी यज्ञ की तैयारी में है तो मान लीजिए/कर दीजिए उसके सुझाव पर अलम/ दे दीजिए निजी कंपनियां चलाए टृ्रेनें। आपने बुलेट प्रूफ रेल चलाने के हवन चुनाव पूर्व किए/ सपने दिखाए/ छोड़िए कम से कम सही समय पर सही तरीके से तो रेल चले/इसकी तो व्यवस्था हो। धर्म संकट में रहकर देश नहीं चल सकता खासकर यूं ही अगर हवन होते रहे देश ही नहीं सिनेमा उद्योग भी धर्म संकट में पड़ जाएगा। देखिए ना, पीके ने हंगामा क्या बरपाया /पंडित-मौलवियों की चांदी हो गयी। केंद्रीय फिल्म प्रमाणण बोर्ड को इन धर्म गुरुओं को धर्म संकट से उबारने
का न्यौता देना पड़ रहा। इससे नसीरउदीन व फिल्म में धर्मपाल की भूमिका कर रहे परेश रावल नाखुश हों तो हों। इसमें हर्ज कहां! हर्ज तो, इंदौर के
चंदन नगर में दुष्कर्म की अंगेठी जलाए यज्ञ की तैयारी कर रहे 45 वर्षीय पति रवि चम्पया की हत्या करने में 39 साल की उसकी पत्नी फेमीदा बी को भी नहीं हुआ। जिस देवी ने अपने पति की हत्या महज इस वजह से कर देती / हत्यारिन बन जाती है कि उसका पति रवि उस यज्ञ में अपनी बीस साला सौतेली
बेटी की आहूति देने की तैयारी में था। आज भी देश उन देवियों उषा सरीखे/ भरोसे जिंदा है जो महाराष्टृ्र के लातूर में पति तुका राम की चिता के
पास खुद जली मिलती है। अब प्रधानमंत्री जी…आपके झारखंड को मुंबई बनाने/शिव सैनिकों सरीखे/ उन्माद/ बिहार, उत्तर प्रदेश समेत अन्य प्रांतों के लोगों के प्रति नफरत/गुस्सा/ फैलाने/ उन्हेें नौकरी नहीं देने के लिए स्थायी नीति की घोषणा रधुवर करने जा रहे और खुद शिव सैनिक/ राज ठाकरे की भूमिका में आने की तैयारी में हैं तो इस हवन को करने से भला उन्हें रोक कौन सकता? अब तो महज पांच लाख में आइएएस प्रोबेशनर के फर्जी पहचान पत्र लाल बहादुर शास्त्री राष्टृ्रीय प्रशासन अकादमी से बंटने/मिलने लगे हैं। मंत्रालयों की जासूसी/वहां से कागजात बाजार में बिक ही रहे/ फर्जी आइएएस रूबी चैधरी सामने आ ही गयी तो अब चाहिए क्या? हवन के पूरे सामान सामन हैे/ मिल गए। तो फिर देर किस बात की…शुरू करो भाई हवन की तैयारी… बजाओ गाना…ये हवन कुंड/मस्तों का झुंड/ सूनसान रात….बोलो क्या करेंगे/हवन करेंगे…हवन करेंगे…हवन करेंगे…।

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
April 4, 2015

पूरे सप्ताह भर के समाचारों का हवन …वह भी एक साथ …अब तो बीस साल तक हवन होगा बकौल अमित शाह, और युगपुरुष/ योग पुरुष तब तक तो जवान बने ही रहेंगे …उनकी समिधा का क्या होगा? आदरणीय ठाकुर साहब आपकी अनूठी शैली धाराप्रवाह भी उस हवन की अग्नि को शांत कर सकेगा? सादर!


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